भोजन कब लेना चाहिए

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भोजन कब लेना चाहिए ? और क्या क्या लेना चाहिए सेब  ?अंगूर ,संतरा ,टमाटर और पालक आदि।

भोजन कब लेना चाहिए? आज हम भोजन के बारे में विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे। सबसे पहला प्रश्न उठता है कि भोजन क्या है , और इसे हमें क्यों लेना चाहिए , इसका क्या-क्या फायदा है और क्या-क्या नुकसान है। सभी प्रश्नों पर चर्चा करेंगे।

 ऐसा कहा जाता है कि सबसे पहले भगवन ने भोजन का व्यवस्था किया फिर इंसान को भेजा, उदाहरण के तौर पर आप समझ सकते है कि कैसे बच्चे को
जन्म लेने से पहले उसकी माँ के सीने में दूध आ जाता है मन और तन को सही और सुचारु से चलने के लिए भोजन का सही और सुमेलित होना जरूरी
है। कुदरत के नियम का अगर हम सही-सही पालन करेंगे तभी हमारा तन और नम स्वस्थ रहेगा। नहीं तो हम बीमार पड़ जायेंगे। स्वस्थ रहने के लिए
हर हाल में हमें कुदरत का नियम का पालन करना ही पड़ेगा।

महीना

चैत्र

वैशाख

जेठ

असाढ़

सावन

भादो

कवार

कार्तिक

अगहन

पौष

माघ

फाल्गुन

खाना चाहिए

सुबह सुबह चना

बेल रस

दिन में बीस मिनट सोना

खेलकूद में लगन बढ़ाना

बाल हरड़

 

गुड़

आंवला

तेलयुक्त भोजन

दूध

घी खिचड़ी

सुबह सुबह नहाना चाहिए

नहीं खाना चाहिए

गुड़

तेल

राई

बेल फल

निम्बू

दही

करेला

दही

जीरा

धनिया

मिश्री

चना

 

चलिए इस प्रश्न का उत्तर जान लेते हैं कि भोजन कब लेना चाहिए? भोजन किया है। भोजन ऊर्जा है जो हमारे शरीर के कार्य क्षमता को बढ़ता है और हमें शक्ति प्रदान करता है।

आज-कल लोग इतना बीमार आहार और विहार के कारण पड़ता। अगर लोग खान पियन और रहन सहन को सुधार ले न तो बीमार न के बराबर पड़ेंगे।

सुबह- सुबह सूर्योदय का समय भोजन के लिए अतिउत्तम मन गया है उसी समय जानवर ,पशु , पक्षी और अन्य जीव भी भोजन करते हैं कियोंकि उस समय पेट की जठराग्नि बहुत गर्म होती है। आप उस समय भरपेट खाएं। आप जो भी खाएंगे वह सही से पच जायेगा और शरीर में पूरा तागत लगेगा। ध्यान रहे भोजन करने के ३० मिनट बाद पानी पीना चाहिए। अगर आप उसी समय पानी पी लेते हैं तो गर्म जठराग्नि ठंडी पड़ जाएगी फिर खाना सही से हजम नहीं होगा। यही क्रम सूर्यास्त के समय होता है। आप सूरज ढलने से पहले भोजन कर लें। दोपहर के समय हल्का भोजन लें। रात में गर्म दूध ले सकते हैं।

खाना खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए ? इसको उदाहरण से समझिये। जब हम पकौड़ा बनाते है तब हम पहले कड़ाही में तेल को खूब खौलाते है फिर उसमे पकौड़ा तलते हैं। पकौड़ा आसानी से पक जाता है। अगर खौलते तेल में हम पानी डाल देंगे तब क्या होगा? पकौड़ा पूरापूरा नहीं सीझेगा और अधपका पकौड़ा हो जायेगा। ऐसे ही प्रक्रिया पेट में होता है। जब हम पहला निवाला लेते है उसी समय समय से पाचन प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाता है।

 

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